उनकी यात्रा किसी पद या कुर्सी से नहीं, बल्कि कॉलेज के कैंपस से शुरू हुई थी। जब कई लोग चुप थे, तब गौरी शंकर ने अपनी आवाज़ उठाई — युवाओं के विकास, नौजवानों के हक़ और किसानों के अधिकार के लिए। कॉलेज के दिनों में उन्होंने छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया, और वहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई।
गौरी शंकर कश्यप उन नए सोच वाले नेताओं में से हैं जो जुनून को अपना मिशन बनाते हैं। वे कहते हैं — “जब सिस्टम बदलने की बात हो, तो आवाज़ उठाना फ़र्ज़ बन जाता है।”





